भागलपुर: बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर ने आम की खेती में की नई खोज, सीडलेस आम की वेरायटी तैयार

रिपोर्ट – सुमित कुमार, भागलपुर

भागलपुर स्तिथ बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर ने एक नए और अनोखे आम की वेरायटी तैयार की है, जिसे “सीडलेस मैंगों” कहा जा सकता है। इस वेरायटी का नाम “सिंधु” है, जिसमें आम के बीज नहीं होते हैं या बहुत ही छोटे होते हैं। बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ डी आर सिंह ने बताया कि फिलहाल 30 की संख्या में नए आम की वेरायटी, रिलीज करने वाली फ्रूट रिसर्च टीम के जिम्मे है। आम की वैसी वेरायटी भी तैयारी की जा रही जिससे दिसंबर तक आम का फलन हो सकेगा। साल दर साल आम का फल देने वाले पेड़ भी तैयार किये जा रहे हैं जिससे 2000 से ज्यादा आम का फलन होगा। बिहार आम के उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे नंबर पर है। 9.5 टन प्रति हेक्टेयर आम का उत्पादन बिहार में होता है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर आम का उत्पादन 8.8 टन प्रति हेक्टेयर है।

बिहार के भागलपुरी जर्दालु आम को भारत सरकार ने जेआई टैग से नवाजा भी है। नए सिरे से बीएयू द्वारा 12 वेरायटी के नए आम को जेआई टैग के लिए भारत सरकार के पास भेजा गया है। बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने आम की कई वेरायटी तैयार की हैं और आम के उत्पादन में सुधार करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। सीडलेस आम की वेरायटी तैयार करने का उद्देश्य आम के उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार करना है।

इस वेरायटी के आम का स्वाद और गुणवत्ता भी अच्छी होगी और पौष्टिक मूल्य में भी सुधार होगा बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर र द्वारा आम की कई नई वेरायटी तैयार की जा रही हैं, जो आम के उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार करेंगी। इन वेरायटी में आम का फलन अधिक होगा और आम का स्वाद और गुणवत्ता भी अच्छी होगी।बिहार आम के उत्पादन में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे नंबर पर है। राज्य में आम का उत्पादन 9.5 टन प्रति हेक्टेयर है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर आम का उत्पादन 8.8 टन प्रति हेक्टेयर है। बिहार के आम की मांग देशभर में है और राज्य के आम उत्पादकों को आम की खेती से अच्छी आय होती है।

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