- बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल को आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय ने डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजा
- बेटियों ने बढ़ाया आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय का मान ! 63 गोल्ड मेडलिस्ट में 47 छात्राएं अव्वल
रिपोर्ट – दुर्गेश कुमार, पटना
PATNA: आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना (Aryabhatta Knowledge University, Patna) का 9वां दीक्षांत समारोह सोमवार को सम्राट अशोक कन्वेंशन सेंटर के बापू सभागार में गरिमामय तरीके से संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता बिहार के महामहिम राज्यपाल सह विश्वविद्यालय के कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खान ने की। इस अवसर पर आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों से 29,955 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की जानी थी। जिनमें से 2,076 विद्यार्थियों ने समारोह में भाग लेने के लिए पंजीकरण कराया है, जिसे डिग्री दी गई। वहीं 63 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, तथा 67 शोधार्थियों को पीएच.डी. की डिग्री प्रदान की गई।

63 विद्यार्थियों को मिला गोल्ड मेडल; 47 छात्राएं रहीं अव्वल
दीक्षांत समारोह का सबसे गौरवपूर्ण क्षण तब देखने को मिला जब 63 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। इनमें 47 छात्राएं और 16 छात्र शामिल रहे, जो विश्वविद्यालय में उच्च स्तर पर लड़कियों की शैक्षणिक उत्कृष्टता को दर्शाता है। गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम, नवाचार, अनुसंधान और अन्य शैक्षणिक उपलब्धियों के आधार पर सम्मानित किया गया।

मानद उपाधि से सम्मानित हुए मुख्य सचिव व न्यायमूर्ति
समारोह में 2 विशिष्ट व्यक्तित्वों को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल को समाज, प्रशासन और न्याय क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। सभागार में उपस्थित छात्रों और अतिथियों ने दोनों विशिष्टजनों का तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।


67 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि
समारोह में विभिन्न संकायों के 67 शोधार्थियों को उनके सफल शोध कार्यों के लिए पीएचडी की उपाधि दी गई।
यह उपलब्धि विश्वविद्यालय में शोध माहौल की मजबूती और गुणवत्ता में निरंतर वृद्धि को दर्शाती है। शोधार्थियों ने मेडिकल, इंजीनियरिंग, सामाजिक विज्ञान, शिक्षा और नर्सिंग जैसे क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है।

विद्यार्थियों में दिखा उत्साह और उल्लास
समारोह में उपाधि लेने पहुंचे विद्यार्थियों में विशेष उत्साह देखा गया। भारतीय संस्कृति को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने विशेष ड्रेस कोड लागू किया था। छात्र को सफेद कुर्ता और पायजामा के साथ पगड़ी । वहीं लड़कियों के लिए साड़ी और सलवार सूट पहन कर आने का निर्देश दिया गया था । छात्र-छात्राओं की पारंपरिक वेशभूषा और मुस्कुराते चेहरे समारोह को और भी आकर्षक बनाते रहे।

राज्यपाल ने कहा—“जीवन में शिक्षा नहीं, ज्ञान चाहिए; आत्मसंयम ही मनुष्य का श्रेष्ठतम धर्म”
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने सभी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि डिग्री पाना लक्ष्य नहीं है। वास्तविक शिक्षा वह है जो व्यक्ति में जिज्ञासा, खोज और निरंतर सीखने की ललक जगाए। उन्होंने कहा, “जीवन में सिर्फ शिक्षा नहीं, ज्ञान प्राप्त करने का प्रयास कभी रुकना नहीं चाहिए। स्वास्थ्य और आत्मिक उन्नति के लिए आजीवन सीखते रहना आवश्यक है।” राज्यपाल ने भारतीय ज्ञान–परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है जब वह समाज और राष्ट्र की सेवा में उपयोग हो। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज को संवेदनशील, करुणाशील और प्रगतिशील बनाने में करें।उन्होंने कठोपनिषद का प्रसिद्ध मंत्र उद्धृत करते हुए कहा, “दा–दा–दा”, जिसका अर्थ है — दम (आत्म संयम), दान और दया। राज्यपाल ने कहा कि इन तीनों गुणों से युक्त व्यक्ति ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
समारोह में कई गणमान्य उपस्थित
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) शरद कुमार यादव, कुलसचिव डॉ. निरंजन प्रसाद यादव, परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव रंजन, वित्त अधिकारी रामजी सिंह, विभिन्न विभागों के डीन और संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
