DESK: शंकरा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में “सतत कृत्रिम बुद्धिमत्ता — जन, प्रकृति और प्रगति” विषय पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। देश-विदेश से पधारे विद्वानों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं तथा विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की सहभागिता ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शिव प्रताप शुक्ल, राज्यपाल (हिमाचल प्रदेश) ने अपने संबोधन में भारत की वैज्ञानिक एवं आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हुए पोखरण परमाणु परीक्षण ने भारत को वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ स्थापित किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास का लक्ष्य केवल तीव्र गति से आगे बढ़ना नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण, उत्तरदायी और मानवीय व्यवस्था का निर्माण करना होना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि अश्विनी कुमार चौबे ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा कि सतत कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल आधुनिक तकनीक नहीं, बल्कि मानवता के भविष्य के प्रति एक नैतिक प्रतिबद्धता है। तकनीक तभी सार्थक है जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचकर उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाए।
उन्होंने शंकरा संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान शिक्षा को उद्योग से, अनुसंधान को नीति से और ज्ञान को संस्कार से जोड़ने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना को तकनीकी विकास का मूल आधार बताया।
संस्थान के संस्थापक डॉ. संत कुमार चौधरी ने सभी अतिथियों एवं प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन सतत विकास के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
देशभर के 300 से अधिक तकनीकी एवं प्रबंधन संस्थानों के विद्यार्थियों की सहभागिता से यह आयोजन “लघु भारत” का जीवंत स्वरूप बन गया। 32 से अधिक विषयों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में 33 लाख रुपये तक की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई, जिसमें छात्राओं की पूर्ण टीम के लिए विशेष पुरस्कार की व्यवस्था भी की गई।
अंत में आयोजकों ने सभी विशिष्ट अतिथियों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। सम्मेलन ने शिक्षा, नैतिकता और नवाचार के समन्वय से संवेदनशील, समावेशी और आत्मनिर्भर भारत निर्माण का संदेश दिया।
