PATNA: आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (Aryabhatta Knowledge University) ने गुरूवार को अपना 16वां स्थापना दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित दो दिवसीय समारोह में शैक्षणिक, सांस्कृतिक और मैराथन गतिविधियों की विविध श्रृंखला देखने को मिली। छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी से पूरा माहौल उल्लासमय बना रहा।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. के. रुक्मणी, विशिष्ट अतिथि कर्नल राहुल शर्मा तथा मुख्य वक्ता ब्रजकिशोर गुप्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति शरद कुमार यादव ने की। बिहार की गौरवशाली शैक्षणिक परंपरा नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए कुलपति डॉक्टर शरद कुमार यादव ने कहा कि आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय उसी उत्कृष्टता को पुनर्जीवित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने विश्वविद्यालय की हालिया उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्टेम सेल रिसर्च, दर्शनशास्त्र, खगोल विज्ञान और प्रबंधन जैसे नए संकायों की स्थापना की गई है। साथ ही, उन्होंने भविष्य की योजनाओं का जिक्र करते हुए नैनो-साइंस और स्टेम सेल अनुसंधान के लिए विश्वस्तरीय प्रयोगशालाएँ स्थापित करने की दिशा में विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दोहराया। कुलपति ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय सक्रियता का उल्लेख करते हुए जापान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के अपने अनुभव साझा किए और बताया कि विश्वविद्यालय अब वैश्विक शैक्षणिक साझेदारियों की दिशा में तेजी से अग्रसर है।
कुलसचिव डॉ. निरंजन प्रसाद यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा की गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति से यह कार्यक्रम यादगार बन गया। कर्नल राहुल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि छात्र नालंदा और विक्रमशिला जैसी गौरवशाली धरोहर पर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जहाँ AI, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य जैसी आधुनिक चुनौतियाँ उनके लिए नए अवसर लेकर आती हैं। उन्होंने छात्रों से ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने हेतु नवाचार करने और अपने ज्ञान का उपयोग व्यक्तिगत लाभ से आगे बढ़कर मानवता की सेवा में करने का आह्वान किया।
प्रो. के. रुक्मणी ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय की शोध प्रदर्शनी, फोटो प्रदर्शनी, अन्य विभागों द्वारा बनाए मॉडलों तथा छात्रों के स्वागत गीत और नवरस नृत्य की सराहना करते हुए कहा कि इसने सभी में सकारात्मक ऊर्जा और आनंद का संचार किया। उन्होंने डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, नीतीश कुमार, मीरा कुमार और ईशान किशन का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार ने हमेशा ही देश को प्रतिभाएं दी हैं। यह स्थापना दिवस आत्ममंथन का अवसर है, जो हमें अपनी यात्रा और भविष्य की दिशा पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है। वहीं बृज किशोर गुप्ता ने छात्रों को अपने-अपने अध्ययन क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बिहार की उन महान विभूतियों का उल्लेख किया, जिन्होंने राज्य को देश और विश्व स्तर पर एक नई पहचान दिलाई। उन्होंने छात्रों से इन व्यक्तित्वों से प्रेरणा लेकर अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।

दो दिवसीय समारोह के अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। 18 मार्च को प्रथम दिवस की शुरुआत रंगोली प्रतियोगिता से हुई, जिसमें छात्रों ने अपनी रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। 19 मार्च को द्वितीय दिवस का आरंभ प्रातःकालीन मैराथन दौड़ से हुआ, जिसने पूरे परिसर में ऊर्जा का संचार कर दिया। इसके बाद स्कूल ऑफ नैनोसाइंस एंड नैनोटेक्नोलॉजी, स्कूल ऑफ जर्नलिज़म एण्ड मास कम्यूनिकेशन और स्कूल ऑफ जियोग्राफिकल स्टडीज़, स्कूल ऑफ स्टेम सेल टेक्नोलॉजी, पाटलिपुत्र स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, स्कूल ऑफ एस्ट्रोनॉमी, स्कूल ऑफ रिवर स्टडीज़ एवं अन्य विभागों द्वारा शोध, फोटोग्राफी प्रदर्शनी तथा मॉडल प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों की प्रतिभा और नवाचार की झलक देखने को मिली। इस अवसर पर स्कूल ऑफ जर्नलिज़म एण्ड मास कम्यूनिकेशन की प्रायोगिक पत्रिका ‘आर्यभट्ट टाइम्स’ के 16वें स्थापना दिवस के विशेष संस्करण का भी विमोचन किया गया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में CIMAGE कॉलेज के विद्यार्थियों द्वारा स्वागत गान और ‘नवदुर्गा नृत्य’ की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। इसके अतिरिक्त स्कूल ऑफ जर्नलिज़म एण्ड मास कम्यूनिकेशन के छात्रों द्वारा ‘ज्ञान का चश्मा’ नाटक का मंचन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के छात्रों ने कबीर-रहीम के दोहे और फ्यूजन डांस जैसे रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के समापन चरण में स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जिससे छात्रों का उत्साह और बढ़ा। अंत में परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजीव रंजन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया और राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ।

