रिपोर्ट – दुर्गेश कुमार, पटना
- कुलसचिव ने मामले की शिकायत राज्यपाल से की, निष्पक्ष जांच और अधिकारियों-कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
- विवि प्रशासन का दावा- करीब 1,344 पृष्ठों के दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद भी अतिरिक्त फाइलों की मांग की जाती रही।
PATNA: आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (AKU) पटना में शनिवार को शिक्षा विभाग की जांच टीम के पहुंचने के बाद हंगामा हो गया। विश्वविद्यालय के विभिन्न मामलों की जांच के लिए सरकार की ओर से गठित समिति शनिवार को करीब 11 बजे विवि पहुंची थी। जांच टीम में शामिल शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा ने कुलसचिव से संबंधित दस्तावेजों की मांग की। इसी दौरान किसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस हो गई।
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि जांच समिति की ओर से करीब 1,344 पृष्ठों के दस्तावेज मांगे गए थे। इन दस्तावेजों को उपलब्ध कराने में विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सहयोग किया। विवि प्रशासन के अनुसार, मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने के बाद भी समिति की ओर से अतिरिक्त फाइलों और अभिलेखों की मांग की जाती रही। इनमें जैम (GeM) से संबंधित फाइलें और अन्य प्रशासनिक दस्तावेज शामिल थे।

कुलसचिव ने लगाया अमर्यादित व्यवहार का आरोप
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. निरंजन प्रसाद यादव ने जांच समिति के समन्वयक पवन कुमार सिन्हा पर अमर्यादित व्यवहार और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। कुलसचिव का आरोप है कि जांच के दौरान विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों को कथित तौर पर धमकीपूर्ण भाषा में संबोधित किया गया।विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित तौर पर “हाथ तुड़वाने की धमकी” दिए जाने के आरोप को गंभीर मामला बताया है। हालांकि, ये आरोप विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। हंगामे के बाद विश्वविद्यालय के कई कर्मचारी धरने पर बैठ गए और मामले में कार्रवाई की मांग की।
विशेष सचिव ने कहा- जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे अधिकारी
वहीं, शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा का आरोप है कि विश्वविद्यालय के अधिकारी जांच में अपेक्षित सहयोग नहीं कर रहे थे। दस्तावेज उपलब्ध कराने और जांच प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी।
राज्यपाल को भेजा पत्र
कुलसचिव की ओर से राज्यपाल सचिवालय को पत्र भेजकर पूरे मामले की शिकायत की गई है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया के दौरान जांच समिति के समन्वयक का अधिकारियों के प्रति व्यवहार कथित रूप से आपत्तिजनक और अमर्यादित था।
विवि प्रशासन ने मामले का तत्काल संज्ञान लेने, विश्वविद्यालय के अधिकारियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा संस्थागत गरिमा बनाए रखने की मांग की है। साथ ही आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से यह भी मांग की गई है कि यदि लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन सहित उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इसके अलावा जांच समिति के गठन और उसकी कार्यप्रणाली को लेकर भी विश्वविद्यालय प्रशासन ने सवाल उठाए हैं।
