फोटोग्राफी है अभिव्यक्ति का माध्यम; विश्व फोटोग्राफी दिवस पर आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय में फोटो प्रदर्शनी का आयोजन

रिपोर्ट – दुर्गेश कुमार, पटना

PATNA: विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय अंतर्गत स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में बुधवार को कुलपति प्रो. डॉ. शरद कुमार यादव के मार्गदर्शन में फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी का शुभारंभ स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की विभागाध्यक्ष एवं फोटो प्रदर्शनी की संयोजक डॉ. मनीषा प्रकाश ने फीता काटकर किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों द्वारा प्रकृति, समाज, संस्कृति, पर्यावरण, जीवन के विविध रंगों और देशभक्ति से जुड़े आकर्षक एवं रचनात्मक छायाचित्र प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी का उद्देश्य विद्यार्थियों में फोटोग्राफी के प्रति रुचि एवं रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ दृश्य माध्यम की शक्ति और सामाजिक अभिव्यक्ति में उसकी भूमिका को समझाना था।

गूगल फॉर्म के द्वारा ऑनलाइन मतदान  के जरिए प्रथम तीन विजेताओं का चयन किया गया। इस मतदान में प्राध्यापकों, विद्यर्थियों और विभाग के तकनीकी सहायकों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान एमए जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के छात्र सौरभ कुमार यादवेंदु, द्वितीय स्थान जान्वी तथा तृतीय स्थान वहाब रजा ने प्राप्त किया।

प्रमाण पत्र और मेडल के साथ तीनों विजेता

स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (एसजेएमसी) की विभागाध्यक्ष डॉ. मनीषा प्रकाश ने कहा कि, “दुनिया हमें अपनी आंखों से देखने पर बहुत खूबसूरत लगती है, लेकिन कैमरे के माध्यम से देखने पर यह और भी खूबसूरत दिखाई देती है। कैमरा हमें इस दुनिया को एक अलग दृष्टिकोण से देखने का अवसर प्रदान करता है।” उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी केवल किसी क्षण को कैद करने का माध्यम नहीं, बल्कि किसी दृश्य, भावना और विचार को एक नए नजरिए से प्रस्तुत करने की कला भी है।

कार्यक्रम के सह-संयोजक एवं स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (एसजेएमसी) के अतिथि प्राध्यापक  डॉ. शिवम रस्तोगी ने कहा कि, “एक तस्वीर शब्दों से अधिक कहती है और फोटोग्राफी एक कला है।” उन्होंने कहा कि एक प्रभावशाली तस्वीर बिना किसी विस्तृत व्याख्या के भी भावनाओं, घटनाओं और विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों को फोटोग्राफी को केवल तकनीकी कौशल के रूप में नहीं, बल्कि रचनात्मक अभिव्यक्ति और संचार के प्रभावशाली माध्यम के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (एसजेएमसी) के अतिथि सहायक प्राध्यापक डॉ. संदीप कुमार दुबे ने विद्यार्थियों को 3-पॉइंट लाइटिंग की अवधारणा और उसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि की-लाइट, फिल-लाइट और बैक/हेयर लाइट के संतुलित प्रयोग से किसी व्यक्ति या विषय को अधिक प्रभावशाली ढंग से कैमरे में प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को यह भी समझाया कि स्टूडियो फोटोग्राफी, वीडियो प्रोडक्शन, इंटरव्यू, पोर्ट्रेट और अन्य दृश्य माध्यमों में प्रकाश व्यवस्था का सही उपयोग किस प्रकार तस्वीर की गुणवत्ता और प्रभाव को बेहतर बनाता है।

प्रकाश के महत्व को समझाते डॉ. संदीप कुमार दुबे

कार्यक्रम के दौरान फोटो बूथ भी लगाया गया, जहां विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों ने तस्वीरें खिंचवाकर विश्व फोटोग्राफी दिवस की यादों को संजोया। विश्व फोटोग्राफी दिवस के अवसर पर विभाग के अतिथि सहायक प्रोफेसर डॉ. अनुपम प्रियदर्शी, डॉ शिवम रस्तोगी, ईशा बिरले, विभाग के विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थी, कर्मचारी आदि उपस्थित रहे।

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